हल्द्वानी
हल्द्वानी में बिना वैध डिग्री और जरूरी पंजीकरण के चिकित्सा सेवाएं देने वालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती तेज कर दी है। राजपुर क्षेत्र में प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और औषधि निरीक्षक की संयुक्त टीम ने निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान सात क्लिनिक और मेडिकल स्टोर जांच के दायरे में आए। कुछ प्रतिष्ठानों में दस्तावेजों से जुड़ी अनियमितताएं मिलने पर कार्रवाई भी की गई। आखिर क्या है पूरा मामला, देखिए ये रिपोर्ट।
हल्द्वानी में अवैध रूप से चिकित्सा सेवाएं देने और नियमों के विपरीत मेडिकल स्टोर संचालित करने वालों पर प्रशासन का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। जिलाधिकारी के निर्देश पर राजपुर क्षेत्र में संयुक्त टीम ने विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेयी, एसीएमओ डॉ. रजत भट्ट और ड्रग इंस्पेक्टर मीनाक्षी बिष्ट समेत प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान सात क्लिनिक और मेडिकल स्टोर में वैध पंजीकरण और आवश्यक योग्यताओं से संबंधित अनियमितताएं सामने आईं। कुछ लोग अपनी दर्ज योग्यता से अलग चिकित्सा पद्धति में प्रैक्टिस करते मिले। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने बताया कि कुछ स्थानों पर आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा एलोपैथिक दवाएं बेचने के मामले भी सामने आए, जिनमें संबंधित प्रतिष्ठानों को सील किया गया।
वहीं, छापेमारी के दौरान कुछ मेडिकल स्टोर बंद मिले, जबकि कुछ संचालक टीम के पहुंचने से पहले ही वहां से चले गए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ऐसे संचालकों को बुलाकर दस्तावेजों की जांच की जाएगी। निरीक्षण के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों पर वैध डिग्री और पंजीकरण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी नहीं मिले। एक-दो डेंटल प्रतिष्ठानों की भी जांच की गई।
सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेयी ने बताया कि बिना पंजीकरण चिकित्सा व्यवसाय करने और निर्धारित योग्यता के बिना प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ जांच अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, एसीएमओ डॉ. रजत भट्ट के मुताबिक, बंद मिले प्रतिष्ठानों के संचालकों को बुलाकर उनके दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर रोक लगाना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अब देखना होगा कि दस्तावेजों की आगे की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर क्या कार्रवाई होती है।

